महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में किसानों की आत्महत्याओं की संख्या चिंताजनक स्तर पर सरकार ने मदद का दिया आश्वासन
इंडियालाइवटीवी महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में किसानों की आत्महत्याओं की संख्या चिंताजनक स्तर पर पहुँच गई है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2025 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) में राज्य में 767 किसानों ने आत्महत्या की। मराठवाड़ा में इस अवधि में आत्महत्याओं की संख्या 269 रही, जो 2024 की तीसरी तिमाही की तुलना में अधिक है।अनियमित और असमय हुई बारिश से कई जिलों में फसलों का भारी नुकसान हुआ है।
विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया
हाल के मौसम में लगभग 17.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें बर्बाद हुई हैं। सरकार ने 2019 से अब तक प्राकृतिक आपदाओं के मुआवजे के लिए करीब ₹14,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस पार्श्वभूमि पर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि,“सरकार किसानों को केवल खोखले आश्वासन देती है, लेकिन मदद समय पर नहीं पहुँचती। शेतकरी (किसान) आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं और सरकार तमाशा देख रही है।”राष्ट्रवादी कांग्रेस अध्यक्ष शरद पवार ने भी कहा कि,“किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए राज्य सरकार को तुरंत विशेष अधिवेशन बुलाना चाहिए और ठोस उपाययोजना करावी (लागू करनी चाहिए)।
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने दी प्रतिक्रिया
”वहीं सरकार की ओर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी कि,“शेतकरी आत्महत्या गंभीर मुद्दा है। सरकार किसानों को त्वरित राहत देगी और केंद्र से भी अतिरिक्त निधि उपलब्ध कराया जाएगा।”मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अधिकारियों को आदेश दिए कि,“नुकसान का सर्वेक्षण युद्धस्तर पर कर किसानों तक मदद तुरंत पहुँचाई जाए।”राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों के लिए दीर्घकालिक नीति नहीं बनाई गई, तो यह संकट और गहरा सकता है।
